Media Scamsters: मैं किसी मीडिया वाले पर सवाल नहीं उठा रहा। मैं किसी मीडिया वाले को भ्रष्ट लोगों का मददगार भी नहीं कह रहा। मगर, इतना बता और जता रहा हूं कि यदि आप मीडिया वाले हैं और निजी स्वार्थ के चलते किसी भ्रष्टाचारी को ओब्लाईज कर रहे हैं तो सतर्क हो जाइये। क्योंकि इस तरह के लोग अब सिर्फ जेल ही नहीं जा रहे, बल्कि पुलिस रिकॉर्ड में लिस्टेड गैंग लीडर भी बन रहे हैं।
भले ही वो मीडिया के किसी संगठन के अध्यक्ष ही क्यों न बने हों। लिहाजा, गाजियाबाद-गौतमबुद्धनगर सहित दिल्ली-NCR और वेस्टर्न यूपी के मीडिया वालों को भी इस पर ध्यान देने की जरूरत है। वरना! पहले ही से हाशिये पर आ चुकी मीडिया की छवि और रसातल तक पहुंच जाएगी।
क्यों उठाना पड़ा ये सवाल?
दरअसल, कानपुर शहर के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में 28,000 वर्ग मीटर जमीन (अरबों रुपये कीमत) कब्जाने के आरोप में जेल में बंद पत्रकार अवनीश दीक्षित को पुलिस ने रजिस्टर्ड गैंग लीडर करार दे दिया है। कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अवनीश का गिरोह कानपुर रेंज का पहला इंटर रेंज गैंग है, जिसे IR-01 का नाम दिया गया है।
अवनीश दीक्षित बहुत सारे नामचीन मीडिया घरानों से जुड़े रहे हैं। बावजूद इसके, न सिर्फ सलाखों के पीछे हैं, बल्कि उन्होंने पुलिस के रिकॉर्ड में रजिस्टर्ड गैंग लीडर बनकर साबित कर दिया है कि Media Scamsters के चलते मीडिया का स्तर अब हर क्षेत्र में सर्वोपरि हो रहा है। ये बात अलग है कि वो सिर्फ मीडिया के मानकों से विपरीत।
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मीडिया अध्यक्ष के गैंग में 16 रजिस्टर्ड मेंबर
कानपुर मीडिया एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे अवनीश के गैंग में कुल 16 सदस्य हैं, जिन्हें पुलिस ने अपने रिकॉर्ड में रजिस्टर्ड किया है। इनमें गैंग लीडर खुद कानपुर मीडिया एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अवनीश दीक्षित हैं। जबकि झांसी का हरेंद्र मसीह, राहुल वर्मा, मौरिस एरियल, कमला एरियल, अभिषेक एरियल, अर्पण एरियल, जीतेश झा, जितेंद्र शुक्ला, संदीप शुक्ला, विवेक पांडेय, मनोज यादव, मोहम्मद वसीम, मोहम्मद इकलाख, विक्की चार्ल्स और अली अब्बास के नाम भी इनमें शामिल हैं। इनमें भी कई लोग ऐसे हैं जो मीडिया क्षेत्र से ही किसी न किसी तरह से जुड़े हैं।
मीडिया अध्यक्ष के गैंग का मुख्य सदस्य हरेंद्र मसीह
झांसी जिले की क्रिश्चियन सोसाइटी में कभी बतौर चपरासी के पद पर तैनात रहने वाला हरेंद्र मसीह वो शख्स है जिसने देश के बड़े-बड़े भूमाफियाओं और जालसाजों को भी पानी पिला दिया। कभी झांसी की क्रिश्चियन सोसाइटी में चपरासी रहा हरेंद्र मसीह हजारों करोड़ों का मालिक है। यूपी ही नहीं, बल्कि देश की पुलिस इस जालसाज की जिंदा-मुर्दा गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये तक का इनाम घोषित कर चुकी थी। तकरीबन दो महीने पहले ही ये शख्स सलाखों के पीछे पहुंचा है। दावा है कि कानपुर के मीडिया अध्यक्ष के पूर्व अध्यक्ष के गैंग के इस सबसे सक्रिय सदस्य पर देशभर में 50 से भी अधिक संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं।
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ये है हरेंद्र का इतिहास
झांसी के नवाबाद थाना क्षेत्र का रहने वाला हरेंद्र मसीह ने फर्जीवाड़ा कर क्रिश्चियन समिति, क्रिश्चियन अस्पताल और क्रिश्चियन स्कूल के नाम दर्ज जमीनों को कौड़ियों के दाम बेचकर खुद को अरबपति बनाया। आरोप ये भी है कि उसने हजारों करोड़ की बेशकीमती जमीनों को बेचने के लिए पहले क्रिश्चियन संस्था में खुद को चपरासी के पद पर नियुक्त करवाया।
इसके बाद जिस संस्था में हरेंद्र मसीह चपरासी होता, उस संस्था को बंद करवा कर एक नई संस्था खोलता और खुद उस संस्था का डायरेक्टर बनकर क्रिश्चियन समिति की बेशकीमती जमीनों के कागजातों को हासिल कर लेता था। इस करतूत में हमारे Media Scamsters से जुड़े रहे कानपुर के पूर्व अध्यक्ष महोदय स्वार्थवश मदद करते रहे।
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1 लाख करोड़ से ज्यादा कीमती जमीन बेची
जालसाजी और फर्जीवाड़े का ऐसा कॉकटेल हरेंद्र मसीह तैयार करता था, जिसके चलते लाखों-करोड़ों की बेशकीमती जमीनों को फर्जी तरीके से बेचकर करोड़ों रुपये कमा लेता था। हरेंद्र मसीह की गिरफ्तारी को लेकर कानपुर पुलिस और यूपी एसटीएफ कई दिनों तक झांसी में डेरा डाले रही। झांसी के ही रहने वाले अमित गोयल ने हरेंद्र मसीह को लेकर जो राज खोले, उसने सभी को चौंका दिया।
अमित गोयल ने यहां तक दावा कर दिया कि देश के सबसे बड़े भूमाफियाओं में शुमार हरेंद्र मसीह क्रिश्चियन समिति की अब तक 1 लाख करोड़ से भी अधिक की जमीनों को बेच चुका है। इस दावे पर यकीन करें तो भ्रष्टाचार और जालसाजी के सारे रिकॉर्ड हरेंद्र मसीह ने तोड़ दिए। अकेले झांसी में ही हरेंद्र मसीह पर तकरीबन 10 से भी अधिक मुकदमे जमीनों को लेकर दर्ज हैं।
मीडिया और Media Scamsters के गिरते स्तर पर सवाल
कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष और उनके गैंग का ये मामला सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि इसने Media Scamsters और मीडिया की गिरती छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर जल्द ही इसे रोकने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए गए तो मीडिया की विश्वसनीयता रसातल में पहुंच जाएगी।
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