
महीना मार्च यानि चैत का। लेकिन मार्च के तीसरे रविवार ने अचानक सावन वाली फीलिंग करा दी। यानि एहसास करा दिया भीगे-भीगे सन-डे (रविवार) का। देर रात करीब साढ़े तीन बजे से गरज रहे बादलों ने बरसना शुरू किया तकरीबन सुबह सात बजे के बाद । पहले रुनझुन-रुनझुन बूंदा-बादी। फिर अचानक तेज और मूसलाधार स्टाइल में झमाझम बारिश। फिर अचानक सबकुछ सामान्य। लेकिन इस सबके बीच मौसम ने जो करवट ली है, वो एहतियात बरतने वाली है। खासकर मौसम में आए अचानक बदलाव के कारण स्वास्थ्य को लेकर बरती जाने वाली एहतियात को लेकर। बच्चे-बुजुर्ग और खासकर दमा या खांसी-नजला पहले ही से झेल रहे लोगों को। डॉक्टर्स का कहना है कि विशेष एहतियात बरतने की जरूरत है। वरना, पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम के इस बदले रंग के फेर में फंसकर आप बिस्तर पकड़ सकते हैं। अब ये बिस्तर अस्पताल का हो या फिर घर का।
जब चैत में उतर आया सावन
दिल्ली-Ncr में रविवार की सुबह कुछ अलग ही अंदाज में शुरू हुई। देर रात करीब साढ़े तीन बजे से आसमान में बादल गरजने लगे। शुरुआत में तो लगा कि शायद बादल यूं ही गुजर जाएंगे, लेकिन सुबह करीब सात बजे के बाद मौसम ने अपना असली रंग दिखाना शुरू किया। पहले हल्की रुनझुन-रुनझुन बूंदाबांदी हुई, जिसने सुबह की शांति को और भी सुहाना बना दिया। सड़कों पर हल्की नमी, ठंडी हवा और चाय की चुस्कियों के साथ लोग इस मौसम का आनंद लेने लगे। लेकिन कुछ ही देर में बादलों ने जैसे पूरी ताकत के साथ बरसना शुरू कर दिया। देखते ही देखते बारिश तेज और मूसलाधार हो गई — बिल्कुल सावन की झमाझम बारिश की तरह। कुछ समय बाद जैसे अचानक सब शांत हो गया। बादल छंटे, धूप झांकी और मौसम सामान्य सा लगने लगा। लेकिन इस थोड़े से समय में मौसम ने जो करवट ली, उसने सभी को चौंका दिया।
मौसम का यह बदलता मिज़ाज क्यों?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की अचानक बारिश के पीछे अक्सर पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) जिम्मेदार होता है। यह एक ऐसा मौसमीय तंत्र है जो उत्तर भारत में अचानक बारिश, बादल और तापमान में बदलाव लेकर आता है। मार्च के महीने में ऐसी बारिश असामान्य तो नहीं है, लेकिन इसकी तीव्रता और अचानक बदलाव लोगों को हैरान जरूर कर देता है।
बदलते मौसम में स्वास्थ्य का रखें ध्यान
मौसम की यह करवट केवल रोमांच ही नहीं लाती, बल्कि अपने साथ कुछ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी लेकर आती है। डॉक्टरों का कहना है कि अचानक ठंडक और नमी बढ़ने से कई तरह की समस्याएं बढ़ सकती हैं।
खासकर इन लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए:
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बच्चे और बुजुर्ग
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दमा (Asthma) के मरीज
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जिन्हें पहले से खांसी, जुकाम या नजला की समस्या हो
डॉक्टरों का कहना है कि अगर मौसम के इस बदलाव को हल्के में लिया गया, तो लोग जल्दी ही बीमार पड़ सकते हैं। कई मामलों में स्थिति इतनी बिगड़ सकती है कि घर या अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचना पड़ सकता है।
इन सावधानियों का रखें ध्यान
ऐसे मौसम में कुछ छोटी-छोटी सावधानियां आपको बीमार होने से बचा सकती हैं:
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भीगने से बचें और अगर भीग जाएं तो तुरंत कपड़े बदल लें
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ठंडी हवा से बचाव करें
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हल्का गर्म भोजन और पेय पदार्थ लें
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बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सुरक्षा दें
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अगर पहले से सांस या एलर्जी की समस्या है तो दवाएं नियमित लें
मौसम का आनंद भी, सावधानी भी
बारिश का मौसम हमेशा मन को खुश कर देता है। चाय, पकौड़े और ठंडी हवा का संगम हर किसी को अच्छा लगता है। लेकिन इस चैत में सावन जैसी बारिश हमें यह भी याद दिलाती है कि प्रकृति का मिजाज कब बदल जाए, कहा नहीं जा सकता।
इसलिए इस भीगे-भीगे रविवार की यादों को संजोएं, बारिश की खूबसूरती का आनंद लें, लेकिन स्वास्थ्य और सावधानी को कभी नजरअंदाज न करें।
क्योंकि मौसम का मज़ा तभी तक अच्छा है, जब तक वह हमें खुश और स्वस्थ रखे।


