SP is the reason behind BJP Victory: इसमें दोराय नहीं की समाजवादी पार्टी ही एक मात्र वो पार्टी रही जिसके प्रत्याशी ने बीजेपी को सबसे ज्यादा चुनौती देने की कोशिश की। इसमें भी कोई शक नहीं कि सपा-कांग्रेस के उम्मीदवार ही रहे जो अपनी जमानत बचाने में कामयाब रहे। इसे भी नहीं खारिज कर सकते कि केवल सिंघराज ही रहे जिनकी चुनौती देने की उम्मीद खुद बीजेपी को थी। लेकिन इन सबसे अलग आप ये नहीं जानते कि बीजेपी की बंपर जीत में भी इसी समाजवादी पार्टी और इसके उम्मीदवार का बड़ा हाथ है। वो कैसे पढ़ें इस रिपोर्ट में।
अखिलेश ने किया बीजेपी का प्रचार
आप हैडिंग पढ़कर सोच रहे होंगे कि पानी पी-पीकर बीजेपी, योगी और मोदी को कोसने वाले सपा प्रमुख अखिलेश यादव भला कैसे बीजेपी का प्रचार कर सकते हैं ? तो आपको बता दें कि ऐसा अखिलेश ने जानबूझकर नहीं बल्कि अनजाने में किया है। आपको याद होगा कि जब अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में सपा और कांग्रेस के स्थानीय नेता औऱ जनप्रतिनिधियों-कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए आए थे तो उन्होंने अलग-अलग मुद्दों पर बीजेपी और बीजेपी की केंद्र और प्रदेश सरकारों को कोसा था।
मगर अपने भाषण के आखिर में वो अनजाने में बीजेपी के फायदे की एक बात कह गए जिसका फायदा बीजेपी को जमकर हुआ। दरअसल, अखिलेश यादव जोर देकर अपनी और कांग्रेस पार्टी के लोगों को ये बता औऱ जताकर गए कि देखिए उन्होंने जनरल सीट पर भी एक जाटव को टिकट दिया है। उनका ये एहसास कराने के पीछे मंशा थी दलित समाज को एकजुट करके सपा के पक्ष में मतदान करने के लिए प्रेरित करने की। साथ ही पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज को भी ये बताने की कि उनके लिए जनरल कास्ट से ज्यादा अहमियत दलित, पिछड़े औऱ अल्पसंख्यकों की है।
ये बात गाजियाबाद की सीट पर मौजूद जनरल कैटेगिरी के लोगों खासकर ब्राह्मण-वैश्य और ठाकुर समाज को इस कदर नागवार गुजरी कि सबसे कम मतदान होने के बावजूद बीजेपी को ब्राह्मण-वैश्य और ठाकुर समाज का एकतरफा वोट मिला। बसपा के प्रत्याशी वैश्य समाज से होने के बावजूद अखिलेश के इस बयान से नाराज वैश्य समाज ने न तो गर्ग को वोट दिया न सपा को। ब्राह्मण वोटर्स की हालत ये रही कि अखिलेश से नाराज ब्राह्मण समाज के सपा और कांग्रेसी नेताओं ने भी बीजेपी को खुलकर वोट डलवाया। नतीजा आपके सामने है।
इतना ही नहीं ठाकुर समाज के लोगों ने भी अखिलेश के बयान से नाराज होकर जमकर बीजेपी को वोट डाले। हालाकि इस बार बीजेपी के ही ठाकुर समाज से जुड़े लोग पार्टी से नाराज थे। उनकी नाराजगी की बड़ी वजह जनरल वी.के.सिंह का लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद से ही बरकरार थी। मगर अखिलेश के बयान ने सारी नाराजगी पानी-पानी कर दी। नतीजा ये रहा कि ठाकुर समाज से खड़े धर्मेंद्र सिंह सौ का आंकड़ा भी नहीं छू पाए और सारा वोट बीजेपी यानि संजीव शर्मा को मिला।
SP के प्रत्याशी ने भी कम नहीं की बेवकूफी
अनजाने में ही सही सपा प्रमुख जो गलती गाजियाबाद में कर गए उसी तरह की गलतियां करने से सपा के उम्मीदवार सिंघराज भी नहीं चूके। जिसका खामियाजा उन्हें उठाना पड़ा। आपको ध्यान होगा कि बुलंद गाजियाबाद ने ही खुलासा किया था कि वार्ड नंबर 26 में चुनाव प्रचार के दौरान सिंघराज एक मस्जिद में प्रचार के लिए गए। वहां फोटो खिंचवाईं। मुस्लिम समाज के लोगों से अपने पक्ष में मतदान की अपील करके आए। मगर आस-पास कुछ दूरी पर ही मौजूद न मंदिर में गए औऱ न मस्जिद में।
उनकी इस बेवकूफी का नतीजा ये रहा कि उस वार्ड में पार्षद से लेकर पूर्व डिप्टी मेयर तक से लोग नाराज थे। बीजेपी के दशकों से जुड़े नेता भी सिंघराज के बस्तों पर बैठे थे। पुराने भाजपाई देशराज के समर्थक भी सिंघराज के बस्तों पर थे। मगर इलाके के लोगों ने सिंघराज की बजाय बीजेपी को वोट डाला। नाराजगी सिंघराज की हरकत थी।
अखिलेश के लंच ने भी किया नुकसान
गौरतलब है कि भले ही सिंघराज के पक्ष में अखिलेश यादव ने लाईनपार क्षेत्र या गाजियाबाद विधानसभा में कोई प्रचार नहीं किया। मगर वे विजयनगर में अपनी पार्टी के एक संगठन से जुड़े राष्ट्रीय स्तर के नेता के आवास पर लंच करने आए थे। अमन यादव के आवास पर लंच करने पहुंचे अखिलेश से ये चूक शायद इसी वजह से हुई कि उन्हें जानकारी नहीं थी कि अमन के परिवार से ताल्लुक रखने वाले महेश यादव से लाईन पार क्षेत्र में कितनी तादात में लोग नाराजगी रखते हैं।
उस नाराजगी का नुकसान सिंघराज को इस वजह से भी हुआ क्योंकि महेश यादव उनके प्रस्तावकों में भी थे। लिहाजा महेश यादव से नाराजगी रखने वाले गुट ने न चाहते हुए भी बीजेपी का कमल थामा और नतीजा सबके सामने है।
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